Monday, October 17, 2016

dard ko

दर्द को निकाल दे दिल से , कि भरने को ख़ज़ाने और भी हैं।
जीवन से पाने को अभी, नज़राने और भी हैं ।
क्या हुआ जो छूट गया प्रियतम कोई,
मुस्कुरा, कि जीवन में हँसने के भहाने और भी हैं । 

Tuesday, December 31, 2013

जानकारी ही बचाव है

इस युग में जहाँ हर तरफ सुचना का रिसाव है, 
हम  कहते भी हैं कि जानकारी ही बचाव है। 
फिर क्यूँ इस रोग का इतना प्रभाव है ?

अपनों से मन मुटाव है,  या वफ़ा का आभाव है,
जीवन में बढ़ता तनाव है, या यूँ ही भटकता रुझाव है,
सौ समस्याओं का गफलत ही जवाव है। 

राम नाम पर लूट होती , विलुप्त भक्ति का भाव है,
लखवा लग गया लोकतंत्र को , बाज़ारू चुनाव है। 
मरे पड़े कि परवाह नहीं , सनसनी का सबको चाव है ,
सम्मान के नाम पर हत्या होती , ये कैसा स्वभाव है। 

सुनो , समझो और स्वीकारो , मेरा यही सुझाव है ,
बनो जानकार और ये जानो ,
जानकारी ही बचाव है। 

Saturday, December 20, 2008

प्यार में प्यारे

प्यार में प्यारे, कितना भी सम्हाल,
चाल में उछाल, तो आ ही जाता है|

तेरे चेहरे से झलकती है खुशी,
बदला बदला सा है अंदाज़|
तेरी हेर बात लगती है प्यारी,
और हर अदा में है कुछ खास|
सुबह को रहता है तेरा इंतज़ार,
हो क्या गया है तुझको यार,
सबके मुह पर ये सवाल, तो आ ही जाता है|

जब ख़ुद से ज़्यादा हो जाए, प्यार पैर ऐतबार,
आईने में भी चेहरा उसी का, आए नज़र बार बार|
सजी हो महफिल, या किस्मत हो रुसवा,
पर आशिक को आशिकी का ख्याल, तो आ ही जाता है|

हवाए चलना भूल जाती हैं,
फूल करते है भवरो का इंतज़ार|
चाँद ताड़ता है अब चकोर को,
होने लगे बिन बदल बौछार|
असाधु भी करता है साधना, और बेसुरा भी राग गाता है,
हर किसी के हाल में कमाल, तो आ ही जाता है|

राही

ज़िन्दगी के पथ पर चलते चलते, राही तू कभी भटकना नही|
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|
तो क्या हुआ अंधकार अगर है, सुबह फ़िर उजियाली होगी ,
तो क्या हुआ पतजध अगर है, वसंत में फ़िर हरियाली होगी|
निरंतर कर्म तू करता चल, पुण्य का गढा तू भरता चल,
देख इस संसार के सुख तू मत मचल, देख लक्ष्य होने न पाए ओझल|
निगाहें हो सदा तेरी मंजिल पर, पलक भी तू कभी ज्हपकना नही,
ज़िन्दगी के पथ पर चलते चलते, राही तू कभी भटकना नही|


तू बन मत वह लहर जो उठ के ऊंचा, तट पे आते ही बिखर जाती है,
तू बन मत वह मोम जो ज़रा से गर्मी, पते ही पिघल जाते है|
बन सके तो बन वह मशाल, जो जल के भी अपनी मंजिल को पाते है|
हो सके तो दूसरो की भी रहो में तू आशा भर दे,
उनमे भी लक्ष्य को पाने की रही तू अभिलाषा भर दे|
समय की रेत फिसल रही है, रहो में तू फिसलना नही,
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|

जब लोगो में दिल होता था

जब लोगो में दिल होता था,
बिना एक दुसरे के भाई भाई चैन की नींद न सोता था|
गंगू तेली के दुखो पैर रजा भोझ भी रोता था,
और सत्य की टेक पैर हरिश्चंद्र अपना सब कुछ खोता था|
हाँ एक ऐसा वक्त भी होता था, जब लोगो में दिल होता था|

अब यदि मुश्किल में पड़ा एक भाई,
दुसरे ने फौरेन दम दबाई, पीठ दिखाई|
जनता के दुखो पैर सरकार मुस्कुराई,
माँ बाप रोते तक नही, बेटी को देते हुए विदाई|
कभी सोचा न था ऐसा वक्त भी आएगा,
दोस्त यार तो क्या, प्यार भी बिक जाएगा|