इस युग में जहाँ हर तरफ सुचना का रिसाव है,
हम कहते भी हैं कि जानकारी ही बचाव है।
फिर क्यूँ इस रोग का इतना प्रभाव है ?
अपनों से मन मुटाव है, या वफ़ा का आभाव है,
जीवन में बढ़ता तनाव है, या यूँ ही भटकता रुझाव है,
सौ समस्याओं का गफलत ही जवाव है।
राम नाम पर लूट होती , विलुप्त भक्ति का भाव है,
लखवा लग गया लोकतंत्र को , बाज़ारू चुनाव है।
मरे पड़े कि परवाह नहीं , सनसनी का सबको चाव है ,
सम्मान के नाम पर हत्या होती , ये कैसा स्वभाव है।
सुनो , समझो और स्वीकारो , मेरा यही सुझाव है ,
बनो जानकार और ये जानो ,
जानकारी ही बचाव है।
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