प्यार में प्यारे, कितना भी सम्हाल,
चाल में उछाल, तो आ ही जाता है|
तेरे चेहरे से झलकती है खुशी,
बदला बदला सा है अंदाज़|
तेरी हेर बात लगती है प्यारी,
और हर अदा में है कुछ खास|
सुबह को रहता है तेरा इंतज़ार,
हो क्या गया है तुझको यार,
सबके मुह पर ये सवाल, तो आ ही जाता है|
जब ख़ुद से ज़्यादा हो जाए, प्यार पैर ऐतबार,
आईने में भी चेहरा उसी का, आए नज़र बार बार|
सजी हो महफिल, या किस्मत हो रुसवा,
पर आशिक को आशिकी का ख्याल, तो आ ही जाता है|
हवाए चलना भूल जाती हैं,
फूल करते है भवरो का इंतज़ार|
चाँद ताड़ता है अब चकोर को,
होने लगे बिन बदल बौछार|
असाधु भी करता है साधना, और बेसुरा भी राग गाता है,
हर किसी के हाल में कमाल, तो आ ही जाता है|
Saturday, December 20, 2008
राही
ज़िन्दगी के पथ पर चलते चलते, राही तू कभी भटकना नही|
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|
तो क्या हुआ अंधकार अगर है, सुबह फ़िर उजियाली होगी ,
तो क्या हुआ पतजध अगर है, वसंत में फ़िर हरियाली होगी|
निरंतर कर्म तू करता चल, पुण्य का गढा तू भरता चल,
देख इस संसार के सुख तू मत मचल, देख लक्ष्य होने न पाए ओझल|
निगाहें हो सदा तेरी मंजिल पर, पलक भी तू कभी ज्हपकना नही,
ज़िन्दगी के पथ पर चलते चलते, राही तू कभी भटकना नही|
तू बन मत वह लहर जो उठ के ऊंचा, तट पे आते ही बिखर जाती है,
तू बन मत वह मोम जो ज़रा से गर्मी, पते ही पिघल जाते है|
बन सके तो बन वह मशाल, जो जल के भी अपनी मंजिल को पाते है|
हो सके तो दूसरो की भी रहो में तू आशा भर दे,
उनमे भी लक्ष्य को पाने की रही तू अभिलाषा भर दे|
समय की रेत फिसल रही है, रहो में तू फिसलना नही,
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|
तो क्या हुआ अंधकार अगर है, सुबह फ़िर उजियाली होगी ,
तो क्या हुआ पतजध अगर है, वसंत में फ़िर हरियाली होगी|
निरंतर कर्म तू करता चल, पुण्य का गढा तू भरता चल,
देख इस संसार के सुख तू मत मचल, देख लक्ष्य होने न पाए ओझल|
निगाहें हो सदा तेरी मंजिल पर, पलक भी तू कभी ज्हपकना नही,
ज़िन्दगी के पथ पर चलते चलते, राही तू कभी भटकना नही|
तू बन मत वह लहर जो उठ के ऊंचा, तट पे आते ही बिखर जाती है,
तू बन मत वह मोम जो ज़रा से गर्मी, पते ही पिघल जाते है|
बन सके तो बन वह मशाल, जो जल के भी अपनी मंजिल को पाते है|
हो सके तो दूसरो की भी रहो में तू आशा भर दे,
उनमे भी लक्ष्य को पाने की रही तू अभिलाषा भर दे|
समय की रेत फिसल रही है, रहो में तू फिसलना नही,
बस लक्ष्य की तरफ़ ही बढ़ते रहना, राही तू कभी थकना नही|
जब लोगो में दिल होता था
जब लोगो में दिल होता था,
बिना एक दुसरे के भाई भाई चैन की नींद न सोता था|
गंगू तेली के दुखो पैर रजा भोझ भी रोता था,
और सत्य की टेक पैर हरिश्चंद्र अपना सब कुछ खोता था|
हाँ एक ऐसा वक्त भी होता था, जब लोगो में दिल होता था|
अब यदि मुश्किल में पड़ा एक भाई,
दुसरे ने फौरेन दम दबाई, पीठ दिखाई|
जनता के दुखो पैर सरकार मुस्कुराई,
माँ बाप रोते तक नही, बेटी को देते हुए विदाई|
कभी सोचा न था ऐसा वक्त भी आएगा,
दोस्त यार तो क्या, प्यार भी बिक जाएगा|
बिना एक दुसरे के भाई भाई चैन की नींद न सोता था|
गंगू तेली के दुखो पैर रजा भोझ भी रोता था,
और सत्य की टेक पैर हरिश्चंद्र अपना सब कुछ खोता था|
हाँ एक ऐसा वक्त भी होता था, जब लोगो में दिल होता था|
अब यदि मुश्किल में पड़ा एक भाई,
दुसरे ने फौरेन दम दबाई, पीठ दिखाई|
जनता के दुखो पैर सरकार मुस्कुराई,
माँ बाप रोते तक नही, बेटी को देते हुए विदाई|
कभी सोचा न था ऐसा वक्त भी आएगा,
दोस्त यार तो क्या, प्यार भी बिक जाएगा|
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